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पीओके में सुलग उठा जनाक्रोश: कार्यकर्ता की मौत के बाद हिंसा, 11 लोगों की मौत, 70 से अधिक घायल

रावलकोट/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के एक कार्यकर्ता की कथित पुलिस गोलीबारी में मौत के बाद पूरे क्षेत्र में हिंसा भड़क उठी। रावलकोट और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हुई भीषण झड़पों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में पुलिसकर्मी, प्रदर्शनकारी और एक आम नागरिक भी शामिल हैं।

घटना उस समय और गंभीर हो गई जब जेएएसी कार्यकर्ता का शव अस्पताल की मॉर्चरी में लाया गया। बड़ी संख्या में समर्थक वहां जमा हो गए और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदल गया। हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा, लेकिन कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच सीधा टकराव देखने को मिला।

पुंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिस अधिकारियों और एक राहगीर की मौत हुई, जबकि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक ने बताया कि झड़पों में 23 सुरक्षाकर्मी और लगभग 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

लॉकडाउन से पहले बढ़ा तनाव

जेएएसी ने 27 जुलाई को प्रस्तावित क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों के विरोध में 9 जून को लॉकडाउन का आह्वान किया है। संगठन का आरोप है कि विधानसभा की 45 सीटों में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिनका दुरुपयोग किया जाता है। संगठन का कहना है कि इन सीटों पर स्थानीय लोगों के बजाय पाकिस्तान के अन्य हिस्सों के लोगों को नामित किया जाता है, जिससे क्षेत्र के लोगों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।इसी बीच क्षेत्रीय सरकार ने जेएएसी को आतंकरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने पीओके के कई हिस्सों में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं निलंबित कर दी हैं। साथ ही बड़ी संख्या में संघीय पुलिस बल और पाकिस्तानी रेंजर्स की तैनाती की गई है। प्रशासन ने घरेलू और विदेशी पर्यटकों को भी 9 जून से पहले क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है।

‘सरकार ने कत्लेआम शुरू कर दिया’

जेएएसी नेता शौकत मीर ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि सरकार ने रावलकोट में लोगों का “कत्लेआम” शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन लॉकडाउन के दौरान एकजुट रहेगा और अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।

लोगों में बढ़ता असंतोष

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी दमन, बिजली संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों से परेशान हैं। इन समस्याओं ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

हिंसा और प्रतिबंधों के बीच मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाने के फैसले और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उधर, भारत लगातार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कराए जाने वाले चुनावों का विरोध करता रहा है। भारत का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसका अभिन्न अंग है तथा पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करना चाहिए।

पीओके में मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि आम लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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