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बस्ती में मोहर्रम की 10वीं (यौमे आशूरा) पर नगर पंचायत गायघाट स्थित कर्बला में अकीदत और गम का माहौल रहा। गायघाट, थन्हवा, मुड़ियारी, गाना, जनवल, उमरिया समेत आसपास के कई गांवों से ताजियेदार अपने पारंपरिक ताजियों के साथ मातमी जुलूस निकालते हुए कर्बला पहुंचे। यहां हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कर्बला में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार सभी ताजियों का मिलान कराया गया। देर शाम शुरू हुई ताजियों के मिलान की यह प्रक्रिया रात करीब 11 बजे तक चली। इसके बाद मोहर्रम की धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सभी ताजियों को कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक (दफ़न) किया गया। इस पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सीओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी, थानाध्यक्ष कलवारी संतोष कुमार, गायघाट चौकी प्रभारी राकेश मिश्रा तथा 10वीं वाहिनी पीएसी, बाराबंकी के जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। संवेदनशील स्थलों पर पुलिस बल की विशेष निगरानी के कारण हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी के बावजूद पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इसी क्रम में, गायघाट बाजार स्थित लक्ष्मीबाई नगर में अंजुमन रज़ा-ए-मुस्तफ़ा कमेटी ने मोहर्रम के अवसर पर एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। कमेटी के सभासद मो. उस्मान, मेंहदी हसन, मुनीर हसन, सदरे आलम, वज़ीर हसन, बदरे आलम, रशीद अहमद सहित अन्य पदाधिकारियों ने क्षेत्र के सबसे सुंदर एवं आकर्षक ताजिया तैयार करने वाले ताजियादारों को शील्ड एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। कमेटी ने मोहर्रम के दौरान उत्कृष्ट सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण आयोजन संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को भी सम्मानित कर उनका आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने एक बार फिर गायघाट में धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द की परंपरा को प्रदर्शित किया।
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मोहर्रम की 10वीं पर गायघाट कर्बला में आस्था का सैलाब:गायघाट में देर रात तक हुआ ताजियों का मिलान और दफ़न
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