रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।
महराजगंज। विकास की अंधी दौड़ और कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही का एक बड़ा खमियाजा इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मिठौरा आने वाले मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। कहने को तो यह अस्पताल मिठौरा के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-370) के किनारे जगदौर में स्थित है। वर्तमान में इस मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण का कार्य तो हुआ, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के पहुंच मार्ग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। स्थानीय लोगों और अस्पताल के कर्मचारियों के मुताबिक, NH370 के निर्माण के दौरान सड़क के किनारे एक चौड़ी नाली का निर्माण कराया गया है। लेकिन लापरवाही की हद यह है कि इस नाली
को सड़क की सतह से काफी ऊंचा कर दिया गया है। इसके विपरीत, मुख्य मार्ग से निकलकर अस्पताल के प्रांगण तक जाने वाले संपर्क मार्ग की सतह काफी नीचे हो गई है। नाली ऊंची होने के कारण अस्पताल मार्ग पर जमा होने वाले पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं छोड़ा गया है। नतीजतन, हल्की सी बारिश होते ही अस्पताल का मुख्य पहुंच मार्ग टापू में तब्दील हो जाता है। घुटनों तक लगे पानी और कीचड़ के बीच से होकर गंभीर मरीजों, प्रसूताओं और अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों को गुजरना पड़ रहा है। सबसे बदतर स्थिति तब होती है जब इलाज के लिए आने वाले दिव्यांग, बुजुर्ग और बीमार मरीज इस गंदे पानी में संतुलन खोकर गिर जाते हैं। आए दिन लोग यहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इस जनसमस्या की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। करोड़ों की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा और कार्यदायी संस्था की तकनीकी खामी ने विभागीय तालमेल की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय जनता और मरीजों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि अस्पताल मार्ग की सुध लेते हुए तत्काल जल निकासी (नाली में पानी जाने का रास्ता) की व्यवस्था कराई जाए और मार्ग को ऊंचा किया जाए, ताकि लोगों को इस नारकीय स्थिति से निजात मिल सके।












