लखनऊ। प्रदेश के बिजली कर्मियों के निजीकरण विरोधी आंदोलन के 600 दिन पूरे होने पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को समुचित निर्देश देकर मार्च 2023 से अब तक आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने का आदेश दें।
संघर्ष समिति ने कहा कि इससे बिजली कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए और अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में नवंबर 2024 से शुरू हुआ यह आंदोलन आज 600वें दिन में प्रवेश कर गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि आंदोलन के दौरान 85 दिनों तक चले महाकुंभ में बिजली कर्मियों ने निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर पूरे विश्व के सामने उत्तर प्रदेश की कार्यक्षमता का परिचय दिया और प्रदेश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आंदोलन के पूरे दौर में संघर्ष समिति ने किसानों और उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बार-बार यह स्पष्ट किया गया कि आंदोलन के कारण आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी तथा किसानों और उपभोक्ताओं से जुड़े सभी ब्रेकडाउन एवं आपात शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जाएगा।
निजीकरण विरोधी संघर्ष के 600 दिन पूरे:संघर्ष समिति
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