उत्तर प्रदेश: पंजाब कपूरथला जिले के शिवदयाल वाला गांव निवासी हंसा सिंह करीब 25 साल पहले अचानक लापता हो गए थे. परिवार ने उन्हें हर जगह तलाशा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला.
तीन साल तक इंतजार करने के बाद परिवार ने उन्हें मृत मान लिया. इसके बाद सामाजिक परंपराओं के तहत उनकी पत्नी विमला देवी का विवाह उनके छोटे भाई सुखा सिंह से कर दिया गया.
समय बीतता गया और विमला देवी ने अपनी नई जिंदगी को स्वीकार कर लिया. पिछले 22 वर्षों से वह सुखा सिंह के साथ रह रही हैं. इस दौरान उनके तीन बच्चे भी हुए और परिवार सामान्य जीवन जी रहा था. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक आई एक घटना ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी.
करीब तीन दिन पहले नहटौर के नया बाजार में एक अधेड़ शख्स फटे कपड़ों और बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया. उसकी हालत देखकर स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी.
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और उस व्यक्ति से बातचीत की. शुरुआत में वह व्यक्ति साफ-साफ कुछ नहीं बता पा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उसने टूटी-फूटी भाषा में अपना नाम हंसा सिंह बताया और अपना पता पंजाब का बताया.
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की. तकनीक और स्थानीय लोगों की मदद से उसकी पहचान जोड़ने की कोशिश की गई. गूगल सर्च और पंजाबी भाषा जानने वाले लोगों की सहायता से जानकारी जुटाई गई. इसके बाद पंजाब पुलिस से संपर्क किया गया.
महज 72 घंटों के भीतर हंसा सिंह के परिजन नहटौर पहुंच गए. शुरुआत में उनकी पहचान करना आसान नहीं था, क्योंकि 25 साल का लंबा समय बीत चुका था और हंसा सिंह की हालत भी बदली हुई थी.
लेकिन जब उन्होंने बचपन की घटनाएं और परिवार से जुड़ी बातें बताईं, तो उनके भाई और गांव के सरपंच भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.
परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था. 25 साल बाद अपने खोए हुए सदस्य को वापस पाना किसी चमत्कार से कम नहीं था. लेकिन इस खुशी के साथ ही एक बड़ी उलझन भी सामने आ गई.
सबसे बड़ी दुविधा विमला देवी के सामने है. उनके सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि वह किस रिश्ते को प्राथमिकता दें. एक तरफ उनके पहले पति हंसा सिंह हैं, जो 25 साल बाद वापस लौटे हैं.
दूसरी तरफ उनके वर्तमान पति सुखा सिंह हैं, जिनके साथ उन्होंने 22 साल का लंबा समय बिताया है और जिनसे उनके तीन बच्चे भी हैं.
यह स्थिति सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी रूप से भी जटिल है. ऐसे मामलों में परंपराएं, कानून और मानवीय भावनाएं तीनों आपस में टकराते नजर आते हैं. परिवार के सामने यह फैसला आसान नहीं है.
इस पूरे घटनाक्रम में नहटौर पुलिस की भूमिका की काफी सराहना हो रही है. जिस व्यक्ति को लोग शुरुआत में भिखारी समझ रहे थे, पुलिस ने उसके साथ संवेदनशीलता दिखाई.
उसे सम्मान के साथ रखा गया, नहलाया गया, नए कपड़े पहनाए गए और धैर्यपूर्वक बातचीत कर उसकी पहचान को जोड़ा गया.
पुलिस की इसी कोशिश का नतीजा रहा कि एक बिछड़ा हुआ व्यक्ति अपने परिवार से मिल सका. यह उदाहरण पुलिस की मानवीय और संवेदनशील कार्यशैली को भी दर्शाता है.
हंसा सिंह की बुजुर्ग मां जट्टो कौर के लिए यह पल सबसे ज्यादा भावुक था. जब उन्होंने फोन पर अपने बेटे की आवाज सुनी, तो उनकी आंखों से आंसू बह निकले. उन्होंने कहा कि अब वह अपने बेटे को देखकर ही शांति से जीवन जी सकेंगी.
फिलहाल हंसा सिंह अपने परिवार के साथ पंजाब लौट चुके हैं. लेकिन उनके लौटने से जो सामाजिक और कानूनी सवाल खड़े हुए हैं, वे अब भी अनसुलझे हैं.
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज में रिश्तों की जटिलता और परिस्थितियों के आगे इंसानी मजबूरी का एक जीता जागता उदाहरण है. यह दिखाती है कि समय के साथ हालात कैसे बदल जाते हैं और एक फैसले का असर वर्षों तक बना रहता है.











