श्रावस्ती के नासिरगंज क्षेत्र में मोहर्रम का महीना शुरू हो गया है। चांद दिखने के साथ ही आज पहला मोहर्रम मनाया जा रहा है, जो पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में हुई शहादत की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर शिया समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से 10 दिवसीय मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है। इन मजलिसों में अहले-बैत की शहादत को याद किया जाएगा। पहले मोहर्रम से ही दुनिया भर के तमाम इमामबाड़ों में मजलिसों, नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला शुरू हो गया है। अकीदतमंद इमाम हुसैन की कुर्बानी और हक-इंसाफ की जंग को याद कर रहे हैं। नासिरगंज में आयोजित होने वाली ये 10 दिवसीय मजलिसें क्रमवार तरीके से अलग-अलग अजाखानों में संपन्न होंगी। इनमें पहली मजलिस हुसैनिया इमामबाड़े में, दूसरी जनाब शादाब साहब के यहां, तीसरी जनाब बिन्नू साहब के यहां, चौथी जनाब छब्बन साहब के यहां, पांचवी जनाब अंजुम साहब के यहां, छठी मरहूम कर्रार हुसैन साहब के अज़ाखाने में, सातवीं जनाब सुज्जन साहब के यहां, आठवीं जनाब ताज साहब के यहां, नवी जनाब मज्जन साहब के यहां और दसवीं मजलिस जनाब चुन्नन साहब के यहां व ग्यारहवीं मजलिस जनाब नाजिम हैदर साहब के इमामबाड़े में होगी। आयोजन समिति के गणमान्य लोगों अम्मार रिजवी, वकार हैदर, नाजिम हैदर, शादाब हुसैन और नाजिम अली आदि ने क्षेत्रवासियों से शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की है, ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
श्रावस्ती के नासिरगंज में मोहर्रम शुरू:चांद दिखते ही इमामबाड़ों में गूंजी या हुसैन की सदाएं, 11 दिनों तक चलेंगी मजलिसें
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