सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटिया पाण्डेय में स्वच्छता अभियान की स्थिति चिंताजनक है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय बदहाल पड़े हैं। ये शौचालय लंबे समय से बंद हैं। इनके बाहर और पानी की टंकियों के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छता अभियान के उद्देश्यों पर सवाल खड़े करती है। सामुदायिक शौचालय की सफाई व्यवस्था के लिए आरती स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक केयरटेकर की नियुक्ति की गई थी। केयरटेकर को प्रतिमाह मानदेय और सफाई सामग्री के लिए धनराशि दिए जाने का प्रावधान है। हालांकि, इसके बावजूद व्यवस्था पूरी तरह ठप है। केयरटेकर नीलम राव ने बताया कि उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद नियमित रूप से काम किया था, लेकिन उन्हें अब तक केवल 12,000 रुपये का ही पारिश्रमिक मिला है। पिछले तीन महीनों से भुगतान न मिलने के कारण उन्होंने काम बंद कर दिया है। वहीं, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भगवान दास यादव ने कहा कि जब तक सरकार द्वारा केयरटेकर को पारिश्रमिक नहीं मिलेगा, तब तक वह काम कैसे करेगा। उन्होंने इसमें अपनी कोई भूमिका होने से इनकार किया। ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सरवन ने कहा कि शौचालय बंद होने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है और गंदगी के कारण बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। श्रीराम मौर्य ने बताया कि सरकार ने सुविधा तो दी, लेकिन उसकी देखरेख न होने से पूरा पैसा बर्बाद हो रहा है। भगवान दास और लालमन जैसे अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि यदि समय पर सफाई होती और शौचालय खुला रहता तो गांव के लोगों को बहुत राहत मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि गांव में स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सामुदायिक शौचालय को चालू कराने और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।
सामुदायिक शौचालय बना शोपीस:कोटिया पाण्डेय में सफाई व्यवस्था ठप, ग्रामीण परेशान
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