कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक आज सोमवार को होने जा रही है, जिसमें राज्य सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक पर पूरे राज्य के सरकारी कर्मचारियों की नजर टिकी हुई है नई सरकार के गठन के बाद पिछले सोमवार को नवान्न में मंत्रिमंडल की पहली बैठक आयोजित हुई थी।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संकेत दिया था कि आगामी बैठक में सरकारी कर्मचारियों के डीए और वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद से ही कर्मचारियों के बीच उम्मीदें बढ़ गई हैं कि सरकार इस मामले में कोई बड़ा निर्णय ले सकती है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी लंबे समय से बकाया डीए और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान दर पर महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहे हैं।
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चली थी। मामला कलकत्ता हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन सरकार ने जानबूझकर डीए रोके रखा। बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीए भुगतान का समर्थन किया था।
विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बकाया डीए को लेकर घोषणा की थी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा था कि रोपा-2009 के अनुसार कर्मचारियों को मार्च 2026 से बकाया डीए मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के एक वर्ग का आरोप है कि तय समय बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक डीए नहीं मिला है।
कुछ कर्मचारियों ने यह भी दावा किया है कि उन्हें बताया गया था कि डीए की एक राशि उनके पीएफ खाते में जमा कर दी जाएगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें नई भाजपा सरकार से बढ़ गई हैं।












