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Europe Heatwave 2026: यूरोप में भीषण गर्मी ने मचाई तबाही, फ्रांस में 1000 मौतों का दावा, स्पेन-इटली में रेड अलर्ट, ब्लैकआउट का खतरा

Europe Heatwave News: यूरोप इस समय भीषण गर्मी और लू (Heatwave) की चपेट में है। पिछले दो महीनों में दूसरी बार आए इस प्रचंड हीटवेव ने फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और ब्रिटेन समेत कई देशों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे हजारों लोग हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन की चपेट में हैं। कई देशों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है, जबकि बिजली संकट और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की आशंका भी जताई जा रही है।

फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित, 1000 मौतों का दावा

फ्रांस इस भीषण हीटवेव का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से करीब 1000 अतिरिक्त मौतों का दावा किया जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि 54 से अधिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट लागू है। गर्मी से राहत पाने के लिए समुद्र और झीलों में उतरे कई लोगों की डूबने से भी मौतें हुई हैं। बच्चों और बुजुर्गों में हीटस्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

स्पेन, इटली और ब्रिटेन में भी बिगड़े हालात

स्पेन में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। जंगलों में आग का खतरा बढ़ने के बाद कई क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। इटली के प्रमुख शहरों रोम, मिलान, फ्लोरेंस और वेनिस में भी रेड अलर्ट लागू है। लगातार एसी चलने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे कई शहरों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।

ब्रिटेन में भी मौसम विभाग ने दुर्लभ रेड अलर्ट जारी किया है। लंदन समेत दक्षिणी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। रात में भी तापमान 20 डिग्री से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही।

यूरोप में ब्लैकआउट का बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम के अत्यधिक उपयोग से बिजली की मांग तेजी से बढ़ गई है। इटली, फ्रांस, ग्रीस और अन्य देशों के पावर ग्रिड पर भारी दबाव है। यदि मांग लगातार बढ़ती रही तो कई देशों में बड़े स्तर पर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है।

क्या है भीषण गर्मी की वजह?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस हीटवेव के पीछे ‘ओमेगा ब्लॉक’ और ‘हीट डोम’ जैसी मौसम प्रणालियां जिम्मेदार हैं। इनकी वजह से सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं यूरोप के ऊपर फंस गई हैं। वहीं, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण ऐसी हीटवेव अब पहले से ज्यादा लंबी, अधिक तीव्र और बार-बार देखने को मिल रही हैं।

सरकारों ने उठाए बड़े कदम

गर्मी से निपटने के लिए कई यूरोपीय देशों ने स्कूल बंद कर दिए हैं या आधे दिन की कक्षाएं शुरू की हैं। कई शहरों में कूलिंग सेंटर, क्लाइमेट शेल्टर और मुफ्त पेयजल की व्यवस्था की गई है। फ्रांस, स्पेन और इटली में लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। वहीं, निर्माण कार्य और खेतों में काम करने के समय में भी बदलाव किया गया है।

आगे क्या?

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी यूरोप को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। यदि तापमान इसी तरह बना रहा तो जनजीवन, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और बिजली व्यवस्था पर इसका असर और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं।

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