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दिकौली की दरगाह पर उमड़ा आस्था का सैलाब:श्रावस्ती में बुरवा बाबा और बड़े पुरुष की मजार पर पहुंचे सैकड़ों अकीदतमंद


श्रावस्ती जिले के दिकौली ग्राम सभा में स्थित बुरवा बाबा एवं बड़े पुरुष की दरगाह पर आयोजित मेले में रविवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और माथा टेककर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दुआ मांगी। धार्मिक आस्था से जुड़े इस मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। वहीं, मेले के आयोजन से स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर भी मिला, जिससे गांव के छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। मन्नत लेकर दरगाह पहुंचते हैं श्रद्धालु दिकौली स्थित बुरवा बाबा एवं बड़े पुरुष की दरगाह को लेकर क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां सच्चे मन से माथा टेकने और मन्नत मांगने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग अपनी अर्जियां लेकर दरगाह पर पहुंचते हैं। दूर-दूर से पहुंचते हैं जायरीन मेले में केवल आसपास के गांवों के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने दरगाह पर चादर चढ़ाई और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे दिन मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और माहौल भक्तिमय नजर आया। मेले ने बढ़ाई गांव की रौनक मेले के आयोजन से दिकौली ग्राम सभा में चहल-पहल बढ़ गई। श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण स्थानीय बाजारों में भी रौनक देखने को मिली। छोटे दुकानदारों, खिलौना विक्रेताओं, खान-पान की दुकानों और अन्य कारोबारियों को अच्छा व्यापार मिला। स्थानीय लोगों को मिला रोजगार का सहारा ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के मेले केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। मेले के कारण कई परिवारों को अस्थायी रोजगार मिलता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी मदद मिलती है। ग्रामीण बोले- क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है यह मेला स्थानीय निवासी मुस्कान, राजन, नीरज और उमेश ने बताया कि बुरवा बाबा एवं बड़े पुरुष की दरगाह पर लगने वाला यह मेला क्षेत्र की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि मेले में हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जिससे गांव में उत्साह का माहौल बनता है। आस्था और रोजगार का संगम बना आयोजन दिकौली का यह मेला धार्मिक विश्वास के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का भी केंद्र बन गया है। श्रद्धालुओं की आस्था जहां इस आयोजन को विशेष महत्व देती है, वहीं स्थानीय लोगों के लिए यह रोजगार और आय का अवसर लेकर आता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मेले के दौरान बेहतर व्यवस्थाएं बनाए रखने की उम्मीद जताई है, ताकि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और बेहतर रूप से हो सके।

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