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नियमितिकरण के संबंध में छह सप्ताह के भीतर प्रत्यावेदन को निस्तारित करने के निर्देश

नैनीताल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कुमाऊं विवि नैनीताल के बायोटेक्नॉलाजी विभाग भीमताल में संविदा पर कार्यरत याचिकाकर्ता के नियमितिकरण के संबंध में छह सप्ताह के भीतर प्रत्यावेदन को निस्तारित करने के निर्देश विवि को दिए हैं।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार भीमताल निवासी महेश चंद्र ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि याचिकाकर्ता 2007 में कुमाऊं विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में एक प्रोजेक्ट में अनुबंध पर लैब अटेंडेंट के रूप में काम करने के बाद 2009 में उन्हें कुमाऊं विश्वविद्यालय में अनुबंध पर चौकीदार के रूप में नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि तब से वे लगातार चौकीदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और संबंधित सभी पक्षों द्वारा उनके काम को संतोषजनक माना गया है लेकिन उन्हें नियमित करने की उनकी मांग पर विचार नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि 2026 में विश्वविद्यालय की सेवा में अन्य ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया था जिनकी स्थिति याचिकाकर्ता जैसी ही थी, जबकि याचिकाकर्ता की मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से सक्षम प्राधिकारी से यह निर्देश देने की मांग की थी कि वे उन्हें नियमित करने की उनकी मांग पर विचार करें। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की स्थिति उन कर्मचारियों जैसी नहीं है जिन्हें 2026 में नियमित किया गया था। हालांकि उन्होंने यह आश्वासन दिया है कि सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ता की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए विवि को याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए है।

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