गोला गोकर्णनाथ-खीरी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, जमुनाबाद के कृषि वैज्ञानिको द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत विश्वविद्यालय के ही कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपभोग एवं उपयोग, कृषि विविधीकरण, जल संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने छात्रों को बताया कि लगातार असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित संस्तुत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने, हरी खाद, जैव उर्वरकों एवं फसल अवशेषों के समुचित प्रबंधन पर बल दिया। साथ ही साथ छात्रों को बताया कि वे क्षेत्र के किसान भाईयों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करने एवं आय बढ़ाने के उपाय बताएं। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डा. संतोष कुमार विश्वकर्मा ने छात्रों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, हरी खाद, जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा मृदा जांच एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के साथ फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं मृदा संबंधी नुकसान की जानकारी दी। डा. नागेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने छात्रों को बताया कि पशुपालन खेती का आधार है. बिना पशुपालन के भविष्य में खेती करना संभव नहीं हो पाएगा। पशुपालन से खेत में होने वाले फसल अवशेष का बेहतर प्रबन्धन किया जा सकता है। आज का समय यह है कि पशुपालन से ही मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक दशा को सुधारा जा सकता है, अगर किसान पशुपालन कर रहा है तथा उसका खेत स्वस्थ्य है तभी किसान भाईयों की सेहत भी सुधारी जा सकती है। इस मौके पर 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. अनिल कुमार सिंह ने अपनी टीम के साथ प्रतिभाग कर अपने विचार व्यक्त किए।












