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मोहन जोदड़ो की डांसिंग गर्ल को NCERT ने कपड़े क्यों पहनाए? असली vs नकली पर बवाल

साल 1926 में मोहन जोदड़ो की खुदाई में जिस नृत्य करती लड़की की मूर्ति, ब्रिटिश पुरातत्व अर्नेस्ट मैके की टीम ने ढूंढी थी, उसे देश की किताबों में कपड़ा पहनाया जा रहा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने तय किया है कि नृत्य करती लड़की को अब पहले की तरह ‘नग्न’ नहीं दिखाया जाएगा, इसलिए उसे कपड़े पहना दिए गए हैं।

पहले की प्रतिमा में मूर्ति नग्न थी और अब NCERT उसे किताबों में काले रंग से कवर कर चुकी है। अब खूब किरकिरी होने के बाद NCERT कक्षा 9 की आर्ट की किताब में ‘डांसिंग गर्ल’ की ढकी हुई तस्वीर की जगह असली तस्वीर लगाएगा।

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क्यों खास है यह मूर्ति?

नृत्य करती लड़की की मूर्ति करीब 2500 ईसा पूर्व की है। लगभर 10. 5 सेंटीमीटर की यह मूर्ति, दुनियाभर के इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है, भारत में इसकी प्रवृत्ति ही बदल दी जा रही है। यह मूर्ति सिंधु सभ्यता की उन्नत कला और धातु विज्ञान का प्रतीक मानी जाती है। असली मूर्ति दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में रखी हुई है।

दिनेश सकलानी, निदेशक, NCERT:-
यह मामला, जैसे संज्ञान में आया, संबंधित विभाग को इस पर गौर करने का निर्देश दिया गया। विशेषज्ञों से बातचीत के बाद, विभाग ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को उसके असली रूप से बदल रहा है। किताब के डिजिटल प्रकाशन में यह सुधार तुरंत लागू किया जा रहा है, जबकि किताब के नए प्रिंट प्रकाशन में तस्वीर का असली रूप दिखाया जाएगा।

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NCERT ने किया क्या था?

NCERT ने कक्षा 9 की नई आर्ट किताब ‘मधुरिमा’ में सिंधु घाटी सभ्यता की नृत्यांगना की मूर्ति की तस्वीर बदल दी है। मूल मूर्ति में लड़की का ऊपरी शरीर नंगा है, लेकिन किताब में उसे कंधे से नीचे तक पेंट से ढक दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि वह कपड़े पहने हुई है।

हंगामा क्यों मचा?

जिन लोगों ने एतराज जताया है, उनका कहना है कि इतिहास को इतिहास जैसा ही रखना चाहिए, उसे आधुनिक नहीं करना चाहिए। यह मूर्ति मोहन जोदड़ो की खुदाई से मिली है। बीते 25 साल से यह NCERT की किताबों में बिना किसी बदलाव के छपती रही है। NDA की पूर्ववर्ती सरकार में भी इसे छिपाया नहीं गया था।

किस चैप्टर में बदलाव हुआ है?

‘मधुरिमा’ किताब NCERT की पहली आर्ट एजुकेशन सीरीज का हिस्सा है। यह नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा 1 से 10 तक के लिए बनाई गई है। इस किताब के पहले अध्याय ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में यह बदलाव किया गया था। पहले कक्षा 6 के सामाजिक विज्ञान की किताब में भी इस मूर्ति को लेकर आपत्तियां उठी थीं।

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बदलाव क्यों हुआ था?

NCERT के कुछ सदस्यों का तर्क था कि नंगी मूर्ति नहीं दिखाई जानी चाहिए। इतिहासकारों को इस बात से एतराज था। उनका कहना है कि इतिहास को उसी चश्मे से देखना चाहिए, जैसी वह है। अब अगर अंजता-एलोरा की मूर्तियों को कपड़े पहना दिए जाएं तो उनका महत्व क्या रह जाएगा।

इतिहासकार मिशेल दानिनो ने इस फैसले का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि अगर यह उम्र के लिए ठीक नहीं है, तो बच्चे नेशनल म्यूजियम में भी न जाएं, जहां असली मूर्ति रखी है। अंत में मूर्ति को किताब में रखा गया, लेकिन अब उसके कपड़े पहनाए हुए दिखा दिया है।

ऐतराज क्या है?

इतिहासकार मिशेल दानिनो ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा, ‘यह गलत है, छात्रों को गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। तस्वीर बहुत छोटी सी है, धड़ को शैडो से ढक दिया गया है। ऐसी सेंसरशिप, विक्टोरियन काल की सोच जैसी है। नकली छवि छात्रों को नहीं दिखाई जानी चाहिए।’

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