अगर अमेरिका ने हमला किया तो पाकिस्तान वैसा जवाब दे पाएगा जैसा ईरान दे रहा?

अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने हाल ही में पाकिस्तान के बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को वाशिंगटन के लिए बड़ा खतरा बताया। इसके बाद से ही पाकिस्तान में एक नई बहस शुरू हो गई। क्या अमेरिका आने वाले वक्त में पाकिस्तान पर भी हमला करेगा? पाकिस्तान में भी कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के बाद अगला नंबर पाकिस्तान है। वहीं कुछ का कहना है कि पाकिस्तान से पहले तुर्की को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं कि भविष्य में पाकिस्तान पर अमेरिका कोई सैन्य एक्शन लेगा, लेकिन उसके मिसाइल कार्यक्रम से जरूर चिंतित है।

अगर अमेरिका को पाकिस्तान के बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करना है तो उसके पास दो तरीके हैं। पहला- कूटनीति और दूसरा- सैन्य एक्शन। मान लीजिए कि अमेरिका दूसरे विकल्प को चुनता है तो सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान अमेरिकी हमलों के जवाब में ठीक वैसे ही प्रतिक्रिया दे पाएगा, जैसा जवाब मौजूदा समय में ईरान दे रहा है। आइये कुछ तथ्यों के आधार पर इसे समझने का प्रयास करते हैं।

निर्भरता: ईरान दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों को झेल रहा था। इस बीच में उसने अपना एक अलग आर्थिक तंत्र तैयार कर लिया। तेल और गैस से होने वाली कमाई से उसकी अर्थव्यवस्था चलती रही। मगर पाकिस्तान का मामला उल्टा है। वह काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। भारी कर्ज में भी डूबा है। अर्थव्यवस्था भी इतनी मजबूत नहीं है कि वह अमेरिका जैसी महाशक्ति के सामने लंबा युद्ध लड़ सके। अमेरिका की पहल पर ही उसे आईएमएफ से कई बार कर्ज मिला। आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर बड़ी फंडिंग उठाई। हमले की स्थिति में अमेरिका उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है, जिसे पाकिस्तान झेल नहीं पाएगा।

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सैन्य ढांचा: ईरान की तुलना में पाकिस्तान की सेना काफी मजबूत है। मगर अधिकांश ताकत सेना प्रमुख के पास होती है। अगर अमेरिका ने सेना प्रमुख को साध लिया तो पाकिस्तान की सरकार के कहने के बावजूद उसकी सेना अमेरिका के खिलाफ बड़ा एक्शन नहीं लेगी। वहीं ईरान में सेना से अलग आईआरजीसी नाम की धार्मिक सेना है। कमान देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता के हाथ में होती है। हर यूनिट अलग-अलग काम करती है। खुद ही फैसला लेती है। ऐसे में अगर कोई अधिकारी चाहे भी तो पूरी आईआरजीसी को हमला रोकने का आदेश नहीं दे सकता है।

रणनीतिक स्थिति: फारस की खाड़ी के एक छोड़ पर ईरान है। दूसरी तरफ ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर और बहरीन है। मौजूदा युद्ध में ईरान ने इस रणनीति का फायदा खूब उठाया। उसने खाड़ी देशों पर हमला अमेरिका पर दबाव बनाने की खातिर किया। मगर पाकिस्तान चाहकर भी यह रणनीति नहीं अपना सकता है। इसकी वजह यह है कि उसकी खाड़ी देशों पर निर्भरता खूब है।

चोक प्वाइंट: ईरान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नाम का चोक प्वाइंट है। पाकिस्तान को ऐसा कोई रणनीतिक लाभ नहीं प्राप्त है। कराची उसका सबसे अहम पोर्ट है। अगर यहां सटीक हमला किया गया तो पाकिस्तान उसे झेल नहीं पाएगा। कराची की कलंक से बचने की खातिर ही चीन के साथ मिलकर उसने ग्वादर पोर्ट विकसित किया, ताकि युद्ध की स्थिति में जरूरी सामान और ईंधन की आपूर्ति जारी रहे। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले के करके दुनियाभर की ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया। इससे कच्चे तेल के दाम बढ़े। नतीजा यह हुआ कि ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ता चला गया।

लक्ष्य अलग-अलग: ईरान ने दशकों से इजरायल और अमेरिका को ध्यान में रखकर अपनी सैन्य तैयारी की। पाकिस्तान की अधिकांश तैयारी भारत को फोकस करके की गई है। उसके अधिकांश हथियार चीन निर्मित हैं। बाकी अमेरिकी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के वक्त चीनी हथियार विफल साबित हुए हैं। वहीं ईरान के पास प्रॉक्सी आर्मी का एक विशाल नेटवर्क है। जैसे गजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती। मगर पाकिस्तान के पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है।

मिसाइल टनल नेटवर्क: ईरान ने अपने आपको गुरिल्ला युद्ध, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन वारफेयर के तौर पर तैयार किया है। उसके पास मिसाइल टनल नेटवर्क है। यहां हजारों मिसाइलों का जखीरा है। जमीन के भीतर से भी मिसाइलें दाग सकता है। उसके शाहेद ड्रोन खाड़ी देशों में तबाही मचाए हुए हैं। पाकिस्तान के पास घातक मिसाइल हैं, लेकिन इरान की तरह अंडरग्राउंड नेटवर्क है या नहीं… इस पर संशय है।

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पाकिस्तान की दुबई स्ट्रैटजी क्या है?

ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के सबसे बड़े आर्थिक केंद्र दुबई पर हमले करके इसे रणनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया के अन्य देशों पर भी दबाव डाला, क्योंकि दुबई पर होने वाले हर हमले का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा। अब पाकिस्तान शायद ईरान से कुछ सीख रहा है। यही कारण है कि हाल ही में भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रहे अब्दुल बासित ने अपने बयान में कहा था कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है तो हमें तुरंत भारत पर हमला कर देना चाहिए। मुंबई और दिल्ली को निशाना बनाना चाहिए। शायद पाकिस्तान की मंशा भारत के दो सबसे अहम शहरों पर हमले की बात करके अमेरिका पर ठीक वैसे ही दबाव बनाना है, जैसा ईरान दुबई पर अटैक करके कर चुका है।

क्या काम आएगी पाकिस्तान की रणनीति?

अब्दुल बासित से पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी भारत के आर्थिक सेंटर और जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने की धमदी दे चुके हैं। मगर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की दुबई स्ट्रैटजी काम नहीं आने वाली है। दरअसल, यूएई ने अभी तक ईरान के किसी भी हमले का जवाब नहीं दिया। मगर पाकिस्तान के हमले करने की स्थिति में भारत बेहद सख्ती से जवाब देगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी एक झलक भारत ने दिखा भी दी है। वहीं भारत की एयर डिफेंस सिस्टम खाड़ी देशों की तुलना अधिक मजबूत है।