डुमरियागंज नगर पंचायत क्षेत्र में कई सरकारी हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं। भीषण गर्मी के कारण स्थानीय लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) सचिन चौधरी के उन दावों के विपरीत है, जिनमें उन्होंने सभी हैंडपंपों और वाटर कूलरों की मरम्मत का दावा किया था। जमीनी हकीकत ईओ के दावों से बिल्कुल अलग है। कई हैंडपंप कबाड़ में बदल चुके हैं। कुछ के ऊपरी हिस्से गायब हैं, जबकि कुछ के प्लेट या चबूतरे टूटे हुए हैं। इन हैंडपंपों से एक बूंद भी पानी नहीं निकल रहा है, जबकि क्षेत्र में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। हैंडपंपों के आसपास फैली गंदगी और सूखी जमीन पानी की गंभीर किल्लत को दर्शाती है। खराब पड़े ये हैंडपंप केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है। ईओ सचिन चौधरी ने पहले दावा किया था कि नगर पंचायत के सभी हैंडपंप और वाटर कूलर दुरुस्त कर दिए गए हैं। हालांकि, मौके पर टूटे और सूखे हैंडपंप उनके इस दावे को गलत साबित कर रहे हैं। इस स्थिति से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि फाइलों में मरम्मत का काम पूरा हो चुका है, तो जमीन पर ये हैंडपंप क्यों खराब पड़े हैं? क्या रखरखाव के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है? 2018-19 में लगा एक हैंडपंप 2025-26 में ही खराब हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? यह भी प्रश्न उठता है कि क्या ईओ सचिन चौधरी ने कभी स्वयं मौके पर जाकर इन हैंडपंपों की स्थिति का जायजा लिया है, या सभी मरम्मत कार्य केवल वातानुकूलित कमरों में बैठकर कागजों पर ही पूरे कर दिए गए हैं? करोड़ों के बजट के उपयोग पर भी सवालिया निशान लग रहा है।
डुमरियागंज में सरकारी हैंडपंप खराब:नगर पंचायत के दावों के उलट, भीषण गर्मी में शोपीस बने हैंडपंप
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