लखनऊ । भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और इसके साथ ही हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में डॉ. दीक्षिता पांडे ने होम्योपैथी के माध्यम से इन समस्याओं से बचाव के प्रभावी उपाय बताए हैं।डॉ. पांडे के अनुसार, गर्मी में सबसे आम और खतरनाक समस्या हीट स्ट्रोक यानी लू लगना है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बुखार, सिरदर्द, चक्कर और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षणों में होम्योपैथिक दवा बेलाडोना उपयोगी मानी जाती है, जो तेज बुखार, चेहरे की लालिमा और सूखी त्वचा में राहत देती है।
उन्होंने बताया कि गर्मी में डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी एक बड़ी समस्या बन जाती है। इसके लिए नेट्रम म्यूर, चायना और आर्सेनिक एल्बम जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने और कमजोरी दूर करने में मदद करती हैं।त्वचा संबंधी समस्याओं में गर्मी के कारण रैशेज, सनबर्न और घमौरी जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। इन स्थितियों में सल्फर दवा लाभकारी हो सकती है, जो त्वचा की संवेदनशीलता और जलन को कम करती है।
बच्चों में गर्मियों के दौरान उल्टी-दस्त की समस्या भी देखने को मिलती है। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम, वैरेटम एल्बम और कैंफर जैसी होम्योपैथिक दवाएं उपयोगी बताई गई हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दवा का सेवन बिना विशेषज्ञ सलाह के नहीं करना चाहिए।
बचाव के उपाय
डॉ. पांडे ने गर्मी से बचने के लिए लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हरी सब्जियों और मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह दी। इसके अलावा छाछ, लस्सी, खीरा और ककड़ी जैसे ठंडे खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धूप में निकलते समय छाता या टोपी का उपयोग करें, सूती और हल्के कपड़े पहनें तथा आंखों की सुरक्षा के लिए सनग्लासेस का प्रयोग करें। साथ ही गाजर और सेब जैसे फलों का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखने में सहायक होता है।
महत्वपूर्ण सलाह
डॉ. पांडे ने कहा कि होम्योपैथी दवाओं का चयन रोगी की स्थिति और लक्षणों के अनुसार होता है, इसलिए किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।












