पंजाब का नाम आते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले ड्रग्स और नशे की तस्वीर उभरती है। इन दिनों पंजाब सरकार एक अभियान भी चला रही है जिसके चलते ड्रग्स और नशा एक बार फिर से है। उड़ता पंजाब जैसी फिल्मों से लेकर राजनीतिक भाषणों तक, पंजाब को अक्सर देश का सबसे बड़ा नशे का केंद्र बताया जाता है लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। ये आंकड़े इस धारणा से अलग तस्वीर पेश करते हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक ड्रग्स से जुड़े मामलों में पंजाब देश में पहले नंबर पर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, केरल इस सूची में सबसे ऊपर है, जबकि महाराष्ट्र दूसरे और पंजाब तीसरे स्थान पर है।
NCRB के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में देशभर में एनडीपीएस एक्ट के तहत करीब 1.15 लाख मामले दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा केस केरल में सामने आए। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा जबकि पंजाब तीसरे नंबर पर पहुंचा। इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नाम भी सूची में शामिल रहा। आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में केरल की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत, महाराष्ट्र की 12 प्रतिशत और पंजाब की लगभग 11 प्रतिशत रही। यानी सिर्फ इन तीन राज्यों में ही देश के बड़ी संख्या में ड्रग केस दर्ज हुए हैं।
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आंकड़ों के पीछे का सच
आंकड़ों में भले ही पंजाब में नशे की समस्या अन्य राज्यों से कम दिखाई देती हो लेकिन पंजाब में आज के समय में यह एक बड़ा मुद्दा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ दर्ज मामलों के आधार पर किसी राज्य को पूरी तरह नशे का केंद्र मान लेना सही नहीं होगा। NCRB खुद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट करता है कि उसके आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों पर आधारित होते हैं। इसका मतलब यह है कि जहां पुलिस ज्यादा सक्रिय है, वहां केसों की संख्या भी ज्यादा दिखाई दे सकती है। कई राज्यों में बड़े स्तर पर एंटी ड्रग अभियान चलाए जाते हैं, जिसके चलते एफआईआर और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ जाती है।
लगातार बढ़ रहे ड्रग्स के मामले
ड्रग्स के मामलों में अचानक बढ़ोतरी ने एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है। NCRB के मुताबिक साल 2021 में जहां देशभर में करीब 78 हजार एनडीपीएस केस दर्ज हुए थे, वहीं 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.15 लाख से ज्यादा पहुंच गया। यानी सिर्फ एक साल में करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत सेवन और निजी इस्तेमाल से जुड़े मामलों में भी भारी उछाल आया। 2021 में ऐसे मामलों की संख्या 46 हजार के आसपास थी, जो अगले साल बढ़कर 77 हजार से ज्यादा हो गई।
पंजाब में चनावी मुद्दा ड्रग्स
पंजाब में ड्रग्स को लेकर बहस इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि वहां लंबे समय से ड्रग्स एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। सीमा पार से तस्करी, ड्रोन के जरिए हेरोइन सप्लाई और युवाओं में नशे की लत जैसी घटनाओं ने राज्य को लगातार सुर्खियों में रखा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देशभर में जब्त हुई हेरोइन का बड़ा हिस्सा पंजाब से बरामद किया गया था। सीमा से लगे इलाकों में ड्रोन के जरिए ड्रग्स गिराने की घटनाओं में भी तेजी आई है।
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों से पहले राज्य में एक बार फिर ड्रग्स का मुद्दा उठ गया है। पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान चलाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां सरकार पर नशे के खिलाफ काम ना करने का आरोप लगा रही हैं। विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरने लगा है।
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अन्य राज्यों में भी बड़ा मुद्दा
इसके बावजूद आंकड़े यह भी बताते हैं कि सिर्फ पंजाब ही नहीं, बल्कि केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा और अन्य राज्यों में भी ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। हरियाणा पुलिस के मुताबिक 2025 में राज्य में रिकॉर्ड संख्या में एनडीपीएस केस दर्ज किए गए और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी चिट्टा यानी सिंथेटिक ड्रग्स को लेकर हालात गंभीर बने हुए हैं। वहां सरकार ने पंचायत स्तर तक सर्वे और निगरानी अभियान शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार बड़े स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य में भी ड्रग्स अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।












