लखनऊ। निजीकरण की नीतियों एवं बिजली कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न के विरोध में चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को मुजफ्फरनगर एवं मेरठ में बिजली कर्मचारियों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जनपदों में भी आंदोलन के क्रम में विरोध कार्यक्रम निरंतर जारी रहे। संघर्ष समिति के आह्वान पर पिछले 506 दिनों से चल रहे इस आंदोलन के तहत बिजली कर्मी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। साथ ही मार्च 2023 से आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी आगामी भीषण गर्मियों को देखते हुए उपभोक्ताओं एवं किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो,इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और जनसमर्थन के साथ आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद पावर कॉर्पोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए बड़े पैमाने पर अनुभवी आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों को सेवा से हटा रहा है तथा नियमित कर्मचारियों के दूरदराज तबादले कर रहा है,जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव बिजली व्यवस्था पर पड़ना तय है। संघर्ष समिति ने मांग की कि प्रबंधन तत्काल संघर्ष समिति से वार्ता कर समाधान निकाले, आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ले तथा हटाए गए अल्प वेतनभोगी एवं अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर बहाल किया जाए।
बिजली कर्मचारियों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन
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