भारतीय ट्रेन : सोशल मीडिया पर एक नई घटना वायरल हो रही है, जिसमें एक महिला रात भर ट्रेन के कोच में तेज आवाज में रीलें देखती रही। दूसरे यात्री नींद नहीं ले पाए और इसकी शिकायत एक पैसेंजर ने पोस्ट कर दी। वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो गया, जिस पर यूजर्स ने भारी प्रतिक्रिया दी। कई ने इसे “सिविक सेंस की कमी” बताया, जबकि कुछ ने कहा कि भारतीयों के साथ यात्रा करना अब मुश्किल हो गया है। इस पोस्ट को काफ़ी लोकप्रियता मिली है और कई यूजर्स ने लंबी दूरी की यात्रा के दौरान लापरवाह सहयात्रियों से होने वाली परेशानियों को महसूस किया है।
रेडिट पर शेयर कई पोस्ट
इस पोस्ट को रेडिट पर r/indianrailways ग्रुप पर Front_Equivalent_954 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। रेडिट पोस्ट के शीर्षक में लिखा था, ‘जब मेरी यात्रा आखिरकार शांतिपूर्ण होने लगती है, तब मुझे इस तरह के यात्रियों का सामना करना पड़ता है।’
यात्री ने बताया कि वे आखिरकार एक अपेक्षाकृत शांत ट्रेन के डिब्बे में सवार हुए थे, जहां अधिकांश यात्री शांत थे और रात में आराम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह शांति ज्यादा देर तक नहीं रही, क्योंकि अपने पति और बच्चे के साथ यात्रा कर रही एक महिला ने उनकी शांतिपूर्ण यात्रा में खलल डाल दिया। यात्री ने कहा कि, ‘सिविक सेंस की कमी वाली यह मूर्ख महिला पूरी परेशानी के दौरान उपद्रव मचाती रही। सोचिए, आखिरकार आपको एक ऐसी ट्रेन मिली जहां कोई बच्चे चिल्ला नहीं रहे थे, कोई हंगामा नहीं कर रहे थे, रात की यात्रा के दौरान सब लोग शांत थे और तभी आपको अपने डिब्बे में सबसे खराब यात्री मिल गई।’
साथी यात्री भी हुए परेशान
यात्री ने कहा ‘यह महिला पहले तो अपने पति से छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करती रही। यात्री ने बताया कि उसका पति और बच्चा ऊपर की बर्थ पर सो रहे थे, जबकि वह बगल वाली बर्थ पर सो रही थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में उसने अपने पति से बर्थ बदलने के लिए कहा, जबकि ऐसा करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं था। इस अदला-बदली के बाद, महिला अपने फोन पर तेज़ आवाज़ में वीडियो देखने लगी, जबकि बाकी लोग सोने की कोशिश कर रहे थे। बाद में वह आखिरकार तीन-चार घंटे सोई और फिर सुबह साढ़े चार बजे उठकर अपने पति से शिकायत करने लगी।’ उन्होंने आगे कहा कि उसने यात्रा व्यवस्था और कोच के अंदर एयर कंडीशनिंग की शिकायत की। बाद में उसने तब बत्तियां जला दीं जब बाकी लोग सो रहे थे। ‘उसके पति ने भी उससे बत्तियां बंद करने को कहा और हमने भी विनम्रता से कहा। वह कुछ बुदबुदाई और बत्तियां बंद नहीं कीं। मतलब ऐसे अशिष्टों को सीट मिल जाती है, इतनी दिक्कत है तो प्राइवेट जेट खरीद लो और हमसे आओ। लेकिन पैसा नहीं है तो रवैया भी उसके हिसाब से दिखाओ। और अगर आपके पास उतने पैसे नहीं हैं, तो उसी हिसाब से अपना रवैया दिखाएं। वैसे, बच्चे उससे कहीं ज्यादा अच्छे व्यवहार वाले थे।’
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, ‘मैं भी आज यात्रा कर रहा हूं और मेरे डिब्बे में एक परिवार है जो सुबह 4 बजे उठा था। तब से लगातार बातचीत और खाने-पीने का सिलसिला चल रहा है, साथ ही लाउडस्पीकर पर तेज़ आवाज़ में संगीत और भजन भी। इस शोर-शराबे से सभी सो रहे लोग जाग गए। जब उनसे शोर कम करने को कहा गया, तो उन्होंने साफ-साफ कहा, “कितनी देर सोओगे? जागने का समय हो गया है। पूरी दुनिया जाग चुकी है।’
दूसरे ने लिखा कि, ‘अभी सफर कर रहा था, एक अंकल तेज़ आवाज़ में गाने और रीलें सुन रहे थे। एक घंटे इंतज़ार किया और उनसे आवाज़ कम करने को कहा। उनकी इज़्ज़त को ठेस पहुंची, लेकिन मैंने उनसे सबके सामने कहा, तो उन्होंने 5 मिनट बाद आवाज़ कम कर दी। समझ नहीं आता ऐसे लोगों को दूसरों को परेशान करना कैसे ठीक लगता है। मैंने इस तरह का व्यवहार ज़्यादातर गुजरात के लोगों में देखा है। अंकल भी वहीं से हैं।’
तीसरे ने लिखा कि, ‘इन लोगों का घमंड हद से ज़्यादा है। जैसे तेज़ आवाज़ में वीडियो चलाना और मना करने पर भी लाइट बंद न करना, ये सब दिखाता है कि इनमें बुनियादी सहानुभूति की कमी है और ये बेहद आत्ममुग्ध हैं। मुझे उम्मीद है कि इन लोगों के खिलाफ शिकायत करने और कम से कम 6 महीने के लिए यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की कोई व्यवस्था होगी।’












