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बुद्ध पूर्णिमा पर सिद्धार्थ बौद्ध विहार में उत्सव:बौद्धाचार्य ने गौतम बुद्ध के संदेशों पर प्रकाश डाला गया


डुमरियागंज तहसील स्थित जमौता-जमौती के सिद्धार्थ बौद्ध विहार में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान बुद्ध के संदेशों को याद किया। कार्यक्रम की शुरुआत राम भरोसे द्वारा भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित करने से हुई। इसके बाद बौद्धाचार्य अवधेश गौतम ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण पंचशील ग्रहण कराया। सभी श्रद्धालुओं ने एक-एक कर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर मनोज सिद्धार्थ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बुद्ध पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्योहार है, जो वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ था। मनोज सिद्धार्थ ने बताया कि बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में वैशाख पूर्णिमा को लुंबिनी, शाक्य राज्य (जो अब नेपाल में है) में हुआ था। उनका महापरिनिर्वाण 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में कुशनारा (वर्तमान कुशीनगर) में हुआ था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए अहिंसा, करुणा और मैत्री के मार्ग पर चलकर आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। बुद्ध के संदेश वर्तमान परिवेश में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। इसी तरह, क्षेत्र के पटखौली, गौहनियाराज, गौराही बुजुर्ग और महुआखुर्द गांवों में भी भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इन स्थानों पर भी लोगों ने बुद्ध के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर राम नरेश राम, मुरली, विक्रम कुमार, आदर्श सिद्धार्थ, उमेश सिद्धार्थ, अमित सिद्धार्थ, बेचू, संतोष गौतम, कैलाशपति, सुभावती, सरिता गौतम, पुष्पा गौतम और अर्पिता सिद्धार्थ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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