नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को ट्रायल कोर्ट की ओर से मिली उम्रकैद की सजा को निलंबित करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर, 2025 को सेंगर की सजा को निलंबित करते हुए हुए जमानत दी थी। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के लंबित रहने के दौरान सजा को निलंबित रखने का आदेश दिया था।
तीस हजारी कोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया था। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर समेत सभी सातों आरोपितों को भी 10-10 साल की कैद और 10-10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल, 2018 को मौत हो गई थी। दुष्कर्म पीड़िता ने 4 जून, 2017 को जब कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। दुष्कर्म पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई थी।
पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में 20 दिसंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से 10 लाख पीड़िता को देने का आदेश दिया था। तीस हजारी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।












