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मलिहाबाद में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, धमकी देकर बना रहा था दबाव

लखनऊ । राजधानी के मलिहाबाद थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म और धमकी देने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस के अनुसार 28 अप्रैल 2026 को पीड़िता के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी 14 वर्षीय पुत्री को गांव का ही अजीम नामक युवक लंबे समय से स्कूल आते-जाते समय परेशान करता था।

आरोप है कि 22 अप्रैल को आरोपी अजीम ने बालिका को बहला-फुसलाकर घर के पीछे झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता पर शादी का दबाव भी बनाया और मना करने पर परिवार को धमकाता रहा।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। तलाश के दौरान 30 अप्रैल को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर आरोपी को बरगदी गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया गया।

मई के पहले दिन गरज-चमक के साथ हुई बारिश:रात में हुई वर्षा से शादी वाले घरों को हुई परेशानी

#बस्ती_न्यूज

बस्ती के साउघाट और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में मई के पहले दिन रात करीब 1:20 बजे गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। इस अचानक हुई वर्षा से शादी-विवाह वाले घरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि यह लगन के महीने की शुरुआत थी। रात के समय हुई इस बारिश के कारण शादी समारोहों की तैयारियों और मेहमानों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई। कई जगहों पर जलभराव और कीचड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे लोगों को असुविधा हुई। हालांकि, इस बारिश से कुछ राहत भी मिली। गर्मी के इस महीने में अचानक हुई वर्षा से मौसम में ठंडक आ गई, जिससे लोगों को कुछ देर के लिए उमस भरी गर्मी से निजात मिली। स्थानीय निवासियों, जिनमें सुजीत कुमार, शैलेंद्र कुमार, दिलीप कुमार, अरविंद कुमार, जितेंद्र कुमार और वीरेंद्र कुमार शामिल हैं, ने बताया कि लगन के महीने में रात के समय हुई इस बारिश से शादी वाले घरों को विशेष रूप से अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।
#बस्ती न्यूज़ टुडे

बीपीसीएल पेट्रोल पंप पर अनियमितता का आरोप:बृजमनगंज के मटिहनवा खास में ग्रामीणों ने जताया आक्रोश


बृजमनगंज ब्लॉक के मटिहनवा खास स्थित भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) के एक पेट्रोल पंप पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंप संचालक आम वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहनों को पेट्रोल देने में आनाकानी कर रहे हैं, जिससे उनमें भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पेट्रोल के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन उन्हें समय पर ईंधन नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, कुछ चुनिंदा लोगों को कैन में लगभग 50 लीटर तक पेट्रोल आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कैन में इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोल देना नियमों के विरुद्ध है और इससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिल सकता है। नागरिकों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। सरवन गिरी, बबलू जायसवाल, दिलशाद खान, दिलीप जैकी, राहुल जायसवाल और मोहित जायसवाल सहित कई ग्रामीणों ने इस संबंध में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इस संबंध में, उपजिलाधिकारी फरेंदा शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि जांच कराकर यदि अनियमितता पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पेट्रोल पंप मालिक मोहम्मद निसार का कहना है कि कैन अथवा डिब्बे में किसी को तेल नहीं दिया जा रहा है, केवल वाहनों में ही पेट्रोल दिया जा रहा है।

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कुत्ते को खाना खिलाने के विवाद में मारपीट, हत्या के…

गोरखपुर। थाना रामगढ़ताल पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले में दो महिला अभियुक्ताओं को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।

पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैण्ट के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष रामगढ़ताल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अभियुक्ता नेहा पुत्री राजकुमार और अंजली पत्नी लहरी, निवासी मंझरिया बिस्टौल को गिरफ्तार किया।

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घटना 28 अप्रैल 2026 की रात की है, जब कुत्ते को खाना खिलाने की बात को लेकर पड़ोसियों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान अभियुक्ताओं व अन्य लोगों ने वादी के परिजनों पर लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पीड़ित की तहरीर पर थाना रामगढ़ताल में मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में मु0अ0सं0 244/2026 के तहत विभिन्न धाराओं में अभियोग पंजीकृत है। पुलिस द्वारा दोनों अभियुक्ताओं के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी टीम में उपनिरीक्षक रजनीश द्विवेदी, महिला उपनिरीक्षक शिखा सोनी सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 42 साल बाद सेवानिवृत्त:निचलौल के इंटर कॉलेज में विदाई समारोह आयोजित


विकास खंड निचलौल के बापू शताब्दी इंटर कॉलेज जहदा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ताहिर अली 42 वर्षों की सेवा के बाद 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। वे चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। इस अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा उनके सम्मान में एक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रबंधक नाथू चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि सेवानिवृत्ति एक विधिक प्रक्रिया है जिससे प्रत्येक कर्मचारी को गुजरना पड़ता है। प्रधानाचार्य राधेश्याम ने श्री ताहिर अली के सेवा योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वरिष्ठ शिक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने ताहिर अली के 42 वर्षों के लगन और सेवाभाव को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि ताहिर अली ने अपने सेवाकाल में जो छाप छोड़ी है, उससे नए कर्मचारियों को सीख लेनी चाहिए। इस विदाई समारोह में विद्यालय प्रबंध समिति की सदस्य श्रीमती सिमी इरशाद, शिक्षक रामआशीष, चंद्रप्रकाश गुप्ता, कलीमुल्ला अंसारी, राजेंद्र प्रसाद, अखिलेश चौबे, प्रदीप पाण्डेय, अफजल अली सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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बारिश से जोरडीह के किसानों को राहत:गन्ना और मक्का के फसलों को हुआ बड़ा फायदा


बारिश से जोरडीह के किसानों को राहत:गन्ना और मक्का के फसलों को हुआ बड़ा फायदा

मोहनलालगंज हादसा: इलाज के दौरान किशोर की मौत, परिजनों ने हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन

लखनऊ । मोहनलालगंज क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल 12 वर्षीय किशोर अर्पित चौरसिया की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।बताया गया कि 31 मार्च 2026 को अर्पित अपने साथी के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में पहले ही मुकदमा दर्ज कर वाहन को कब्जे में लिया जा चुका था और आरोपी चालक को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी।

घायल अर्पित का इलाज ट्रामा सेंटर में चल रहा था, जहां 30 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने मौरवा-मोहनलालगंज हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की।सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर जाम खुलवाया। फिलहाल स्थिति सामान्य है और पुलिस द्वारा मामले में धाराएं बढ़ाकर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

शहबाज शरीफ ने ट्रंप को दे दिया धोखा? ‘ट्रंप की रणनीति को कमजोर कर रहा पाकिस्तान’

वॉशिंगटन: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच जंग में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस बीच अब कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से इस्लामाबाद पर वॉशिंगटन को धोखा देने के आरोप लग रहे हैं। यह आरोप इसलिए लग रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान ने ईरान को रूस, चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार करने के लिए जमीन के रास्ते 6 मार्ग उपलब्ध कराए हैं। यह तब हो रहा है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की सफलता के लिए पूरे प्रयास किए हैं। 
‘ट्रंप की रणनीति को कमजोर कर रहा पाकिस्तान’
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जे ग्रॉसमैन ने चेतावनी दी है कि ईरान को ये जमीनी मार्ग देकर, पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप की अधिकतम आर्थिक दबाव की रणनीति को कमजोर कर रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे तेहरान को अपने बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी को दरकिनार करने और अपने तेल व्यापार को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में मदद मिलेगी।

‘इस्लामाबाद ने खेला दोहरा खेल!’
ग्रॉसमैन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “ट्रंप प्रशासन, आपके सामने एक समस्या है। आपका अच्छा दोस्त पाकिस्तान, ऐसा लगता है कि उसने अभी-अभी ईरान के लिए जमीन के रास्ते छह नए मार्ग खोल दिए हैं। इससे ईरान के शासन को होर्मुज जलडमरूमध्य में आपकी नाकेबंदी को तोड़ने में मदद मिलेगी। यह ईरान को अमेरिकी दबाव का विरोध जारी रखने में सहायता करेगा। इस्लामाबाद ने एक बार फिर अमेरिका के साथ दोहरा खेल खेला है!।” 

पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल
वैसे देखा जाए तो यह पहला मौका नहीं है जब मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठे है। इजरायल पहले ही इस्लामाबाद पर मध्यस्थता की प्रक्रिया में एक अविश्वसनीय खिलाड़ी होने का आरोप लगा चुका है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में काम करने की पाकिस्तान की क्षमता पर संदेह व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि यह दक्षिण एशियाई देश भरोसेमंद नहीं है।

ईरान ने भी उठाए हैं सवाल
इजरायल के अलावा ईरान ने भी बातचीत की प्रक्रिया में पाकिस्तान की तटस्थता पर संदेह व्यक्त किया है। इब्राहिम रजाई ईरान के दशतेस्तान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता के रूप में कार्य करते हैं। रजाई ने इस्लामाबाद को तेहरान का अच्छा दोस्त तो कहा है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वह उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान पक्षपातपूर्ण है और उसका झुकाव अमेरिका के हितों की ओर अधिक है।

अमेरिका की रणनीति पर पाकिस्तान की सेंधमारी
ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसेना की ओर से की जा रही नाकेबंदी के जरिए ट्रंप तेहरान पर इतना अधिक आर्थिक दबाव डालना चाहते हैं कि वह अमेरिकी मांगें मानने के लिए विवश हो जाए और जंग को उनकी की शर्तों पर समाप्त कर दे। ट्रंप ने अपने प्रशासन को एक लंबी नाकेबंदी के लिए तैयार रहने का निर्देश भी दिया है। ऐसे में अब तेहरान को जमीन के 6 रास्ते देकर इस्लामाबाद ने ट्रंप की रणनीति में सेंध लगा दी है। 

 

एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन वाले घरों की पहचान में जुटी सरकार

एलपीजी कनेक्शन:सरकार उन घरों की पहचान कर रही है जिनके पास एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) दोनों कनेक्शन हैं। यह कदम ड्यूल कनेक्शन के दुरुपयोग को रोकने और सब्सिडी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले महीने एक आदेश जारी कर पीएनजी कनेक्शन वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी कनेक्शन रखना अनिवार्य रूप से बंद कर दिया था। 14 मार्च को जारी अधिसूचना में कहा गया था कि जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी कनेक्शन है, उन्हें अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।

सरकार हो गई है सख्त
यह संशोधन “लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) ऑर्डर, 2000” में किया गया है, जिसे आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को बढ़ावा देने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए उठाया गया है। नए नियमों के तहत तेल कंपनियों और उनके डीलरों को ऐसे उपभोक्ताओं को नया एलपीजी कनेक्शन देने या सिलेंडर रिफिल करने की अनुमति नहीं होगी, जिनके पास पहले से पीएनजी कनेक्शन है।

43,000 से अधिक ऐसे उपभोक्ताओं ने कर चुके सरेंडर
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि अब तक 43,000 से अधिक ऐसे एलपीजी उपभोक्ता, जिनके पास पीएनजी कनेक्शन भी था, अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने इसे “कम संख्या” बताते हुए कहा कि उम्मीद है कि यह संख्या और बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था उन घरों को प्राथमिकता देने के लिए है, जिनके पास पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है।

नई एलपीजी कनेक्शन जारी करने पर रोक
भारत अपनी जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। हाल के वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाओं के चलते ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे सरकार को वितरण व्यवस्था में बदलाव करने पड़े हैं। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए गैस आपूर्ति घटाई गई है और होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक संस्थानों को एलपीजी की उपलब्धता भी सीमित की गई है। सरकार ने नई एलपीजी कनेक्शन जारी करना भी फिलहाल रोक दिया है।

वाह क्या दिमाग लगाया है, महिला ने जुगाड़ देख आप भी हंसने लगेंगे

जुगाड़ : हमारे देश में जुगाड़ करने वाले लोगों की बिल्कुल भी कमी नहीं है। वैसे तो हर इंसान थोड़ा बहुत जुगाड़ अपनी जरूरत के हिसाब से कर ही लेता हैं लेकिन कुछ लोग इस काम में इतने माहिर होते हैं कि उनका जुगाड़ सीधे सोशल मीडिया पर वायरल होने लायक होता है और वायरल होता भी है। आप भी सोशल मीडिया पर होंगे और अगर रेगुलर एक्टिव रहते हैं तो फिर आपने भी ऐसे कई सारे जुगाड़ देखे होंगे जो लोगों का ध्यान खींचने के कारण वायरल होते हैं। अभी भी एक जुगाड़ का ही वीडियो वायरल हो रहा है। आइए आपको उसके बारे में बताते हैं।

वायरल वीडियो में क्या जुगाड़ दिखा?
अभी वायरल हो रहे वीडियो में जुगाड़ दिखा, वो अब तक का सबसे यूनिक जुगाड़ है। दरअसल मां को सोना था मगर बच्चे को नींद नहीं आ रही है और ऐसे में वो अपनी मां को शायद ही सोने देता। इस वजह से महिला ने गजब का दिमाग लगाया। महिला ने एक वीडियो बनाया जिसमें उसकी सिर्फ आंखे नजर आ रही हैं और वो आंखों को खोलते और बंद करते दिखती है। महिला ने ऐसा करते हुए वीडियो बनाया और अपनी आंखों के ऊपर फोन को रख दिया और वीडियो चालू कर दिया। अब बच्चा फोन को देख रहा है तो उसे लग रहा है उसकी मां जग रही है और उसी को देख रही है। बच्चा भी उसी में खोया हुआ है मां भी सो रही है।

 

 

 

 

गर्मियों में सुबह की दाल नहीं होगी खराब, बस दाल पकाने के बाद करें ये काम

दाल : तपीश वाली गर्मी लोगों को घर में भी परेशान करती है। घर का हर कोना इस वक्त आग का गोला बना दिखता है। सबसे ज्यादा घर की रसोई में गर्मी होती है। इस वजह से खाने भी जल्दी खराब हो जाते हैं। इस मौसम में उमस और गर्मी के कारण बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जिसकी वजह से खाना खट्टा हो जाता है। सबसे जल्दी जो चीज खराब होती है वो है दाल। सुबह की बनी दाल दोपहर तक खट्टी हो जाती है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो यहां बताए गए कुछ आसान और स्मार्ट ट्रिक्स को फॉलो कर आप दाल को खराब होने से बचा सकते हैं। 

ज्यादातर देर बाहर न रखें

दाल बनाने के बाद इसे बाहर बहुत देर तक न छोड़ें। दाल को ठंडा होने दें, इसके बाद इसे फ्रिज में रख दें, नहीं तो बैक्टीरिया की वजह से दाल जल्दी खराब हो जाएंगे। 

फ्रिज में दाल रखने का तरीका
दाल को फ्रिज में स्टोर करने के लिए एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें। दाल जब पूरी तरह ठंडा हो जाए तभी इसे फ्रिज में रखें। ऐसा करने से नमी नहीं आएगी और दाल खराब नहीं होंगे। 

दोबारा गर्म करने का तरीका
बार बार दाल को गर्म करने से ये जल्दी खराब हो जाते हैं। इसलिए जितनी दाल खानी हो उतनी ही गर्म करें। जरूरत होने पर दिन में 1-2 बार दाल को उबाल लें। 

स्टोर करने का तरीकाट
दाल को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक के बजाय स्टील या मिट्टी के बर्तन का ही इस्तेमाल करें।  

दाल को ज्यादा दिनों तक न रखें। इसे कम से कम समय में खत्म करें। ज्यादा दिनों तक रखने से दाल में बैक्टीरिया पनप सकते हैं। 

 क्या आपको भी चटपटा खाना अच्छा लगता है? 

भेलपूरी : क्या आपको तीखा, चटपटा और मसालेदार खाने का शौक है? अगर हां, तो आपको भेलपूरी की रेसिपी को जरूर बनाकर देखना चाहिए। भेलपूरी बनाने के लिए आपको न तो ज्यादा फैंसी सामग्री की जरूरत पड़ेगी और न ही आपको ज्यादा समय लगेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भेलपूरी बनाने के लिए आपको एक कटोरी मुरमुरे, एक प्याज बारीक कटा हुआ, एक टमाटर बारीक कटा हुआ, 2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई, एक कटोरी मिक्चर नमकीन, एक कटोरी खट्टी मीठी नमकीन या फिर भुजिया, हाफ चम्मच नमक, एक नींबू, एक चम्मच टोमैटो सॉस, हाफ चम्मच लाल मिर्च पाउडर और हाफ चम्मच चाट मसाला चाहिए होगा। आइए स्टेप बाई स्टेप भेलपूरी की रेसिपी के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।

पहला स्टेप- सबसे पहले प्याज को छीलकर काट लीजिए। इसके बाद टमाटर और हरी मिर्च को धोकर बारीक-बारीक काट लीजिए।

दूसरा स्टेप- अब एक कटोरे में मुरमुरे, बारीक कटा हुआ प्याज, बारीक कटा हुआ टमाटर और बारीक कटी हुई हरी मिर्च को निकाल लीजिए।

तीसरा स्टेप- इसके बाद नमकीन को भी एड कर लीजिए और आप अपनी पसंद के हिसाब से किसी भी नमकीन को चूज कर सकते हैं। अब इसी कटोरे में नमक और नींबू भी निकाल लीजिए।

चौथा स्टेप- अब आपको टोमैटो सॉस, लाल मिर्च पाउडर और चाट मसाला भी निकाल लेना है। आखिर में सभी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लीजिए।

अब आप भेलपूरी को सर्व कर सकते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को भेलपूरी का स्वाद काफी ज्यादा पसंद आएगा। घर पर बनी इस भेलपूरी का स्वाद तो बढ़िया होगा ही और हाइजीन के बारे में भी आपको कोई चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। महज 10 मिनट के अंदर भेलपूरी सर्व करने के लिए तैयार हो जाएगी। अगर कभी घर पर अचानक से मेहमान आ जाएं और आपके पास ज्यादा समय न हो, तो भी आप इस रेसिपी को ट्राई करके देख सकते हैं।

 

सेंट पीटर्स इंटर कॉलेज का शानदार प्रदर्शन, कक्षा 10 व 12 में रहा शत प्रतिशत परिणाम

अम्बेडकरनगर। जिला मुख्यालय के प्रतिष्ठित सेंट पीटर्स स्कूल ने सीआईएससीई वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में एक बार फिर उत्कृष्ट परिणाम देकर अपनी शैक्षिक गुणवत्ता का प्रमाण प्रस्तुत किया। विद्यालय के कक्षा 10 एवं कक्षा 12, दोनों ही कक्षाओं में शत प्रतिशत परिणाम रहा, जिससे छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों में खुशी की लहर है।कक्षा 12 (विज्ञान वर्ग) 
विज्ञान वर्ग में अतुल दुबे ने 97.5% अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं श्रेया वर्मा 95.5% द्वितीय, रिदा खुर्शीद 95.25% एवं हंसिका 95.25% संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहीं। इस वर्ग में कुल 65 छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए, जिनमें से 21 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक प्राप्त किए।कक्षा 12 (वाणिज्य वर्ग) में भी सफलता की कहानी
वाणिज्य वर्ग में काव्या श्रीवास्तव ने 93.25% अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। ऋषि वर्मा 89.75% द्वितीय तथा शिवम भारद्वाज 83.5% तृतीय स्थान पर रहे। इस वर्ग में कुल 17 छात्र शामिल हुए, जिनमें से 2 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए।कक्षा 10 का परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा|
कक्षा 10 के विज्ञान वर्ग में सान्वी सिंह ने 98.6% अंक प्राप्त कर टॉप किया। अभिज्ञान वर्मा 97.8% द्वितीय एवं रचित मिश्रा 97.6% तृतीय स्थान पर रहे। इस वर्ग में कुल 167 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 47 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक प्राप्त किए।वहीं वाणिज्य वर्ग में माही सिंह ने 96.2% अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। आयुष यादव 90.4% द्वितीय तथा नैन्सी वर्मा 89.4% तृतीय स्थान पर रहीं।
जहां एक और कक्षा 10 में 11 बच्चों ने हिस्ट्री जियोग्राफी में, दो बच्चों ने गणित में तीन बच्चों ने कंप्यूटर ने दो बच्चों ने इंग्लिश में वह एक बच्चे ने हिंदी में 100 में से 100 अंक प्राप्त किया|
विद्यालय प्रबंधन ने सभी सफल विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। 
प्रधानाचार्य फादर बैप्टिस्ट डिसूजा ने कहा कि यह सफलता छात्रों की निरंतर मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है आज हम अपने विद्यार्थियों के आईसीएसई  और आईएससी बोर्ड परीक्षाओं में इस वर्ष के उत्कृष्ट परिणाम पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण और लगन ने विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है |
यह उपलब्धि हमारे विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस शानदार सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों का हम हृदय से धन्यवाद करते हैं।”

जितनी कमाई नहीं, उससे ज्यादा है प्राइवेट स्कूलों की फीस, कैसे पढ़ेंगे बच्चे?

भारत में स्कूली शिक्षा प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों के सहारे चलती है। देश के 24.69 करोड़ से ज्यादा बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं और इनमें से एक तिहाई से ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। अब प्राइवेट स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस बेहद परेशान करने वाली है। तमाम रोकथाम के बावजूद इन स्कूलों की फीस इतनी ज्यादा है कि देश की आबादी का एक बड़ा वर्ग इन स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा ही नहीं सकता है। कई स्कूलों की फीस भारत की प्रति व्यक्ति आय से कई गुना ज्यादा है। महानगरों में रहने वाले लाखों लोग अपने बच्चों को स्कूल में तभी पढ़ा पा रहे हैं जब उनके परिवार में कमाने वाले लोगों की संख्या एक से ज्यादा हो।

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2024-25 की रिपोर्ट बताती है कि देश के 24.69 करोड़ बच्चों में से 9.58 करोड़ बच्चे यानी लगभग 39 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों में ही पढ़ते हैं। इसी का असर है कि हर साल गांवों से लेकर शहरों तक हजारों नए प्राइवेट स्कूल खुलते जा रहे हैं। इन स्कूलों की फीस में तो इजाफा होता ही है। अलग-अलग कारणों से फीस के अतिरिक्त भी पैसे लिए जाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर कई स्कूलों का फीस स्ट्रक्चर वायरल हुआ जिसे लेकर खूब चर्चा हो रही है।

कितने महंगे हैं स्कूल?

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई लिस्ट के मुताबिक, Prometheus स्कूल में नर्सरी के बच्चों की सिर्फ ट्यूशन फीस 1,17,000 रुपये सालाना थी। इसके अलावा, स्कूल बस के पैसे और कई अन्य खर्च अलग से लिए जाते हैं। एक और स्कूल पाथवेज स्कूल, नोएडा में साल 2026-27 के लिए क्लास 1 से 8 तक के बच्चों की सालाना फीस 912000 रुपये है। इसके अलावा, 2 लाख रुपये की एडिमिशन फीस, 35 हजार रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रांसपोर्ट फीस, लर्निंग सपोर्ट के 1.75 लाख रुपये और इंग्लिश सपोर्ट के 1.45 लाख रुपये अलग से देने होंगे। इसमें से कुछ फीस वैकल्पिक हैं यानी अगर आप ये सुविधाएं नहीं लेते हैं तो आपको ये पैसे नहीं देने होंगे।

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इसी तरह स्टेप बाय स्टेप स्कूल में नर्सरी की सालाना फीस 4.71 लाख रुपये, शिव नाडर स्कूल की सालना फीस 4.47 लाख रुपये और द श्रीराम मिलेनियम स्कूल की सालाना फीस लगभग 2.3 लाख रुपये है। इन स्कूलों की महीने की औसत फीस निकालें तो लगभग 10 से 30 हजार रुपये महीने की बनती है। जाहिर सी बात है कि इतनी महंगी फीस है तो सुविधाएं भी उसी तरह की होती हैं। अच्छे कमरे, अच्छी सीट और बाकी सुविधाएं भी स्कूल में उपलब्ध हैं। हालांकि, यहां हमारा सवाल मूल रूप से शिक्षा की उपलब्धता और हर व्यक्ति तक उसकी पहुंच को लेकर है।

अगर इसी औसत फीस की तुलना भारत में प्रति व्यक्ति आय से करें तो पता चलता है कि लोगों की कमाई ही इस फीस से कम है। साल 2025-26 के इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, साल 2024-25 में भारत के हर व्यक्ति का सालाना आय 205324 रुपये थी। 2025-26 में इसके 219575 रुपये रहने का अनुमान है। अब अगर इस महीने के हिसाब से देखें तो प्रति व्यक्ति आय लगभग 18 हजार रुपये बनती है।

अच्छी शिक्षा की गारंटी नहीं हैं महंगे स्कूल

इन स्कूलों में लाखों की फीस देने के बावजूद बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। ना तो बच्चों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता है और ना ही उनका शैक्षणिक विकास अपेक्षित रूप से होता है। 2025 में आए नेशनल सैंपल सर्वे के डेटा के मुताबिक, दिल्ली में 10 में से 4 यानी 40 प्रतिशत बच्चे स्कूल के बाद ट्यूशन भी पढ़ते हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर 27 प्रतिशत बच्चे स्कूलों के अलावा ट्यूशन भी पढ़ते हैं। जैसे-जैसे बच्चे आगे बढ़ते हैं कोचिंग पर उनकी निर्भरता बढ़ती जाती है। IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी पूरी तरह से कोचिंग पर ही आश्रित है।

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प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी महंगे कोचिंग संस्थानों पर ही निर्भर हैं और अच्छी रैंक लाने के लिए स्कूल और कोचिंग से इतर खुद भी घंटों मशक्कत करके पढ़ाई करनी पड़ती है। यह दिखाता है कि भले ही स्कूलों की फीस बहुत महंगी हो, कोचिंग संस्थान महंगे हो लेकिन वे अच्छी शिक्षा की गारंटी तो कतई नहीं हैं।

हर साल बढ़ रही फीस

महंगी फीस स्थायी भी नहीं रहती है। हर साल इस फीस में जबरदस्त इजाफा होता है। कई स्कूलों में 20 से 35 प्रतिशत तक का इजाफा देखने के मामले भी सामने आ चुके हैं। LocalCircles का एक सर्वे के मुताबिक, 44 पर्सेंट पैरेंट्स ने माना कि 2022 से 2025 के बीच स्कूल की फीस में 50 से 80 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। सिर्फ 13 पर्सेंट पैरेंट्स ने कहा कि फीस में बढ़ोतरी नहीं हुई।

साल 2025-26 के बारे 81 प्रतिशत पैरेंट्स ने माना कि लगभग 10 पर्सैंट बढ़ोतरी हुई। वहीं, 22 पर्सेंट पैरेंट्स ने माना कि स्कूल की फीस लगभग 30 पर्सेंट बढ़ वहीं। वहीं, लोगों की सैलरी औसतन 9 से 10 प्रतिशत ही बढ़ी। यानी स्कूल में तो ज्यादा पैसे देने ही पड़े, घर में होने वाली बचत में भी कमी हो गई।

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कितने लोगों से दूर हो रही है शिक्षा?

इसे उदाहरण से समझिए। दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय 5.31 लाख रुपये सालाना है। वहीं, प्राइवेट एजेंसियों का आकलन देखें तो दिल्ली-एनसीआर में एक बड़ी आबादी ऐसी भी है जिसकी सालाना आय 8 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक भी है। इस आबादी में बड़ा हिस्सा सैलरी से कमाने और EMI पर खर्च करने वाला है। अगर एक परिवार की महीने की कमाई 2 लाख रुपये है तो उसके घर या फ्लैट की EMI 30 से 50 हजार रुपये महीने, कार की EMI 15 से 25 हजार रुपये, अन्य खर्च लगभग 25 से 30 हजार रुपये महीने हो सकते हैं।

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अगर ऐसे परिवार घर में हाउसहेल्प की मदद लेते हैं तो हर महीने आपके 4 से 5 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। अब अगर इस परिवार में एक भी बच्चा है तो उस इन स्कूलों में भेजने के लिए 25 से 30 हजार रुपये महीने खर्च करने पड़ते हैं। अगर इसी परिवार में एक से ज्यादा बच्चे हों तो उन्हें स्कूल भेजना, पढ़ाना और अन्य खर्चे संभालना मुश्किल हो जाता है।

क्यों है ऐसी समस्या?

भारत शिक्षा पर अपनी GDP का लगभग 4 प्रतिशत ही खर्च करता है जो कि दूसरे विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। भारत से बड़ी इकॉनमी वाले देश अपनी जीडीपी का 6 से 7 प्रतिशत पैसा शिक्षा पर खर्च करते हैं। कम खर्च के कारण भारत में सरकारी स्कूली शिक्षा की व्यवस्था बेहद लचर है। भारत में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल जैसे अच्छे स्कूल तो हैं लेकिन पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में उन स्कूलों की संख्या बेहद कम है।

यहीं से जो जरूरत पैदा होती है उसे भरने वाले प्राइवेट प्लेयर्स का बिजनेस शुरू होता है और शिक्षा की पैकेजिंग की जाती है। अच्छी बिल्डिंग, बेहतर प्रजेंटेशन और पढ़ाई से इतर कई अन्य गतिविधियों का लालच दिखाकर ये प्राइवेट स्कूल अपनी फीस लाखों में पहुंचा देते हैं। मेट्रो शहरों में रहने वाले सैलरी क्लास के लोगों ‘अच्छी शिक्षा’ के लिए अपने बच्चों को इन स्कूलों में भेजने पर मजबूर होते हैं और मोरी रकम चुकाने के लिए उनके पास कोई और रास्ता नहीं होता है।

कितना कमाते हैं भारत के लोग?

साल 2023-24 में ITR फाइल करने वाले लगभग 8 करोड़ लोगों में से लगभग 4 करोड़ लोग ऐसे थे जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम थी। 1.28 करोड़ लोग ऐसे जिनकी आय 5 से 10 लाख सालाना और 50 लाख लोग ऐसे थे जिनकी सालाना आय 10 से 15 लाख रुपये के बीच में थी। यह दिखाता है कि ITR फाइल करने वाले परिवार भी महंगे स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ा सकते हैं। अगर किसी के परिवार में एक से ज्यादा बच्चे हैं और वे मेट्रो शहरों में रहते हैं तो उनके लिए सभी बच्चों को इन महंगे स्कूलों में भेज पाना दूर की कौड़ी है।

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आखिरी जनगणना साल 2021 में होने के कारण भारत के लोगों की आय के ताजा आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई निजी संस्थाओं के सर्वे के आंकड़ों पर ही भरोसा करना होगा। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ‘द डिस्ट्रिब्यूशन ऑफ हाउसहोल्ड इनकम, 2019-2024’ के मुताबिक, साल 2023-24 में भारत के 10 प्रतिशत सबसे गरीब लोग महीने भर में सिर्फ 1059 रुपये ही कमा पा रहे थे। वहीं, सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों की औसत आय 20,380 रुपये ही थी। यह रिपोर्ट दिखाती है कि पिछले 2019 से 2024 के बीच लगभग हर आय वर्ग की कमाई में 6 से 10 प्रतिशत के बीच ही इजाफा हुआ।


कैलाश खेर केदारनाथ मंदिर में माथा टेक लिया आशीर्वाद

कैलाश खेर : बॉलीवुड सिंगर कैलाश खेर ने गुरुवार तड़के पवित्र केदारनाथ मंदिर का दौरा किया और आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रार्थना और अनुष्ठान किए। आधिकारिक बयान के अनुसार बर्फ से ढके हिमालय की शांत पृष्ठभूमि के बीच गायक ने विशेष पूजा-अर्चना की और शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उनकी यह यात्रा इस मौसम में इस पवित्र तीर्थस्थल की कई प्रतिष्ठित तीर्थयात्राओं में से एक है। 

मंदिर के पुजारियों से भी की बातचीत

केदारनाथ धाम में अपने प्रवास के दौरान, खेर ने मंदिर में तैनात सुरक्षाकर्मियों और तीर्थ पुरोहितों से बातचीत की। उन्होंने तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर के समग्र प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए खेर ने कहा कि चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, सुविधाएं बेहद संतोषजनक हैं। उन्होंने सुगम तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने में प्रशासन, सुरक्षा बलों और स्थानीय निवासियों के समन्वित प्रयासों की प्रशंसा की। गायक ने केदारनाथ धाम के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए वहां के दिव्य वातावरण और आभा का वर्णन किया। यात्रा की तस्वीरों में खेर पारंपरिक शीतकालीन पोशाक में मंदिर के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, और पृष्ठभूमि में प्राचीन पत्थर का मंदिर है।

भक्तों के साथ गाया भजन
कैलाश ने यहां पहुंचकर अपना एक वीडियो भी इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। इस वीडियो में कैलाश भक्तों के सामने भगवान शिव का भजन गाते हुए दिख रहे हैं। वहीं मौके पर मौजूद भक्त भी शिव की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। बता दें कि केदारनाथ की यात्रा शुरू हो गई है और यहां भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया है। कैलाश खेर भी यहां भगवान शंकर की शरण में माथा टेकते दिखे। साथ ही यहां कैलाश खेर ने भगवान शंकर का आशीर्वाद भी लिया। बता दें कि कैलाश खेर भगवान शिव के भक्त हैं और उन्हें पहाड़ों से खास लगाव है। कैलाश ने अपने कई इंटरव्यूज में इसका जिक्र भी किया है कि उन्हें भगवान शिव का अनंत अससास और पहाड़ों से काफी जिज्ञासा हुआ करती थी। पहाड़ों की विशालता को देख उन्हें ईश्वर का आभास होता है।