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भनवापुर में कृषि वैज्ञानिक ने की बैठक:कहा- बायोफोर्टिफाइड चावल कुपोषण से लड़ने में सहायक


भनवापुर क्षेत्र कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने सोमवार को बताया कि यदि किसान धान की बायोफोर्टिफाइड किस्मों की खेती करें तो इससे मानव आहार में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होगी। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य सुधारने और कुपोषण की समस्या को कम करने में सहायक होगा। डॉ. सर्वजीत के अनुसार, बायोफोर्टिफाइड चावल आयरन और जिंक जैसे खनिजों का एक उत्कृष्ट स्रोत है। ये खनिज एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य में सुधार होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों के विकास पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। धान की कुछ प्रमुख बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों में CR Dhan 310, CR Dhan 311 और CR Dhan 315 शामिल हैं। ये किस्में 125-130 दिनों में तैयार होती हैं और इनकी उपज 45-50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, DRR Dhan 45, DRR Dhan 48 और DRR Dhan 49 जैसी प्रजातियां भी उपलब्ध हैं, जो 130-135 दिनों में पकती हैं और 48-52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देती हैं। इन प्रजातियों में जिंक की मात्रा 22-25 PPM और प्रोटीन सामान्य किस्मों से अधिक पाई जाती है, जबकि सामान्य प्रजातियों में जिंक 12-16 PPM होता है। जिंक मानव स्वास्थ्य के लिए एक अत्यंत लाभदायक सूक्ष्म तत्व है। Zinco Rice MS एक अन्य प्रजाति है जिसमें जिंक की मात्रा 27.4 PPM तक होती है।

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